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Samastipur News: सरायरंजन मेडिकल कॉलेज में खुली जीविका की 10वीं दीदी की रसोई, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया उद्घाटन

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समस्तीपुर के सरायरंजन स्थित श्री राम जानकी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में जीविका की 10वीं दीदी की रसोई का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया। मरीजों और परिजनों को अब मिलेगा सस्ता, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के सरायरंजन स्थित श्री राम जानकी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल परिसर शनिवार को एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल का गवाह बना। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जीविका के अंतर्गत संचालित “दीदी की रसोई” की नई इकाई का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी, जीविका के वरिष्ठ पदाधिकारी, अस्पताल प्रशासन, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान जीविका से जुड़ी महिलाओं के उत्साह और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह पहल केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

उद्घाटन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने रसोई का निरीक्षण किया और जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता तथा व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्वच्छ एवं किफायती भोजन की व्यवस्था एक बड़ी आवश्यकता होती है। “दीदी की रसोई” इस आवश्यकता को पूरा करने के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।

अस्पताल आने वालों को मिलेगी बड़ी राहत

किसी भी अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को भोजन की व्यवस्था के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें महंगा और अस्वास्थ्यकर भोजन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज परिसर में शुरू हुई यह रसोई मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

यहां निर्धारित दरों पर पौष्टिक, ताजा और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इससे दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले लोगों को विशेष लाभ मिलेगा और उन्हें भोजन के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ेगा।

समस्तीपुर में बढ़ा दीदी की रसोई का नेटवर्क

जीविका के माध्यम से समस्तीपुर जिले में पहले से नौ “दीदी की रसोई” इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। सरायरंजन मेडिकल कॉलेज परिसर में नई इकाई के शुरू होने के बाद जिले में इनकी संख्या बढ़कर दस हो गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिले में इस योजना को लोगों का अच्छा सहयोग और समर्थन मिल रहा है।

जीविका अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में जरूरत के अनुसार अन्य सार्वजनिक संस्थानों और अस्पतालों में भी ऐसी इकाइयों के विस्तार पर विचार किया जा सकता है। इससे अधिक महिलाओं को रोजगार मिलेगा और आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण भोजन की सुविधा भी प्राप्त होगी।

महिलाओं की आर्थिक ताकत बन रही योजना

“दीदी की रसोई” का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इसका संचालन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं करती हैं। भोजन तैयार करने से लेकर वित्तीय प्रबंधन और संचालन तक की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथों में होती है। इससे वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उनकी पहचान बढ़ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक महिलाओं की भूमिका घरेलू कार्यों तक सीमित मानी जाती रही है, लेकिन जीविका जैसी योजनाओं ने इस सोच को बदलने का काम किया है। आज महिलाएं सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

रोजगार के नए अवसर भी हो रहे सृजित

इस योजना का लाभ केवल रसोई में कार्य करने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है। खाद्यान्न, सब्जी, मसाले और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में भी स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उत्पादकों की भागीदारी रहती है। इससे कई स्तरों पर रोजगार के अवसर तैयार होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सामुदायिक आधारित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीदारी से छोटे उत्पादकों और समूहों को भी आर्थिक लाभ मिलता है।

2018 से सफलता की कहानी लिख रही है योजना

बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई “दीदी की रसोई” योजना आज राज्य के कई जिलों में सफलता के साथ संचालित हो रही है। अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में इसके केंद्र लोगों को बेहतर भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं हजारों महिलाएं इस पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

सरकार का मानना है कि यह मॉडल सामाजिक विकास और आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण है। इसी कारण इसके विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।

पेशेवर प्रबंधन से मिलेगा और विस्तार

योजना को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य स्तर पर विशेष प्रबंधन व्यवस्था विकसित की गई है। इसका उद्देश्य सभी इकाइयों में भोजन की गुणवत्ता, संचालन और वित्तीय प्रबंधन को एक समान बनाए रखना है। इससे भविष्य में खुलने वाली नई इकाइयों को भी बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखी गई तो “दीदी की रसोई” आने वाले वर्षों में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

महिलाओं के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक

आज “दीदी की रसोई” केवल भोजन उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था नहीं रह गई है। यह महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। जीविका से जुड़ी महिलाएं अपने कार्यों के माध्यम से समाज में नई पहचान बना रही हैं और दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

समस्तीपुर के सरायरंजन में शुरू हुई यह नई इकाई भी इसी परिवर्तन की कहानी को आगे बढ़ाएगी। उम्मीद की जा रही है कि इससे मरीजों और परिजनों को बेहतर सुविधा मिलेगी, वहीं जीविका से जुड़ी महिलाओं के लिए आय और सम्मान के नए अवसर भी खुलेंगे।

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